
सूरज के उगने को तो दुनिया सुबह कहती है, मेरी सुबह तो तेरे ख़याल से शुरू होती है। चाय का धुआँ और खिड़की से छनती यह धूप, तेरे साथ की एक आरज़ू में फ़ना होती है।

हर सुबह एक नया सपना लाए, खुशियों के साये, दुःखों को भगाए। खुले आसमान में चिड़ियों की गुनगुन, आपका दिन हो रोशन, यही है मेरी दुआ।

खिड़की से जो धूप छनकर चेहरे को छूती है, लगता है जैसे तुम्हारी उंगलियां मुझे जगा रही हैं। नया दिन सिर्फ नया उजाला नहीं मेरे लिए, तेरे साथ एक और शाम बिताने की वजह ला रही है।

सुबह की चाय और तेरा ख्याल, दोनों साथ आते हैं, धूप उतरती है आंगन में, और हम मुस्कुराते हैं। इतनी हसीन लगने लगी हैं मेरी हर सुबह, जब से हम आंख खोलते ही सिर्फ तुम्हें चाहते हैं।
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