तेरे ख्वाबों में खोये हुए, मैं चाँदनी रातों में तन्हा हूँ। हर सुबह की किरन से पूछता हूँ, क्या आज भी तेरी यादों में जीता हूँ।
हर सुबह एक नया सपना लाती है, सूरज की किरणें खुशियों की बातें करती हैं। चलो, मिलकर इस दिन का स्वागत करें, खुशियों से भर लें, ये लम्हे सुनहरे कर दें।
तेरे बिना मुस्कुराना अब मुश्किल है, दुख की परछाइयाँ हर शाम सजती हैं। ख्वाबों में भी अब तेरी कमी महसूस होती है, दिल के किसी कोने में, तेरी याद बसती है।
कुछ लम्हे ऐसे होते हैं, जो दिल के सबसे करीब होते हैं। उनकी यादें होंठों पे मुस्कान लाती हैं, जिंदगी के रंग इन्हीं से सजीव होते हैं।
दौड़ने लगे हैं सब, फ़िटनेस का है बुखार, पर चाय की एक चुस्की, सबको कर दे बेकार। पानी-पत्ते से ज़्यादा पसंद, बिस्किट-कुकीज़ की बात, खुद को टॉस करने से पहले, चाय की दीजिए सौगात।
तेरे बिना हर लम्हा एक फूल की तरह मुरझाता है, यादें तेरी अब मेरी तन्हाई का साया बन जाती हैं। चाँद की रौशनी में भी, तेरा अक्स नहीं दिखता, शायद अब मुझे भी तन्हाई से मोहब्बत हो गई है।
तूने कहा था, 'दिल से खेलना है', पर अब तेरा दिल ही नहीं, बस खेल रह गया। कभी हंसते-हंसते जुदा नहीं हुए, फिर ये आंसू क्यों तेरे ही घर रह गए।
तेरे बिना हर लम्हा एक खाली शाम है, तेरे साथ हर जज़्बात की नई पहचान है। तू मेरी चाहत का वो रंग है, जिससे सजता है मेरा हर ख्वाब, मेरा हर अरमान है।
जब चाँद की रोशनी से तुम मुस्कुराते हो, हर रात मेरी खामोशी में तुम बोलते हो। हवा में तुम्हारी खुशबू बसी रहती है, जैसे हर लम्हा तुम मेरे करीब होते हो।
जब रात की चादर ओढ़े, चाँद आया, तेरी यादों की महक में, दिल लिपटा हुआ पाया। हर एक ख्वाब में तेरा साया बना है, बस एक खामोश दुआ, तेरा साथ चाहा है।