
मैं वो किताब हूँ, जिसे सबने पढ़ा, पर हर पन्ना मेरा एक राज़ छुपाए है, सिर्फ मुखौटों से नहीं, असली रूप से पहचानो, असली अदा से जो दिल में बस जाए।

जब खुद की पहचान बन गई, तो अब किसी की परवाह नहीं। अहंकार नहीं, सिर्फ आत्म-विश्वास है, ज़िंदगी में अब किसी की जरूरत नहीं।

जिंदगी का सफर आसान नहीं, ये समझ लो, हर किसी के लिए मुस्कान नहीं, ये समझ लो। जो पहचानता है मेरी खामोशी को, उसकी कीमत दूसरों से ज्यादा नहीं, ये समझ लो।

खुद से जो किया वादा, वो कभी भी न तोड़ा, इसीलिए मेरी रौनक में, कोई ताज नहीं जोड़ा। जो लोग समझ नहीं पाए, वो बस दिखावे के लिए हैं, मेरी असली पहचान में, कोई लिबास नहीं जोड़ा।
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