1 Shayari
मैं वो किताब हूँ, जिसे सबने पढ़ा, पर हर पन्ना मेरा एक राज़ छुपाए है, सिर्फ मुखौटों से नहीं, असली रूप से पहचानो, असली अदा से जो दिल में बस जाए।