
तेरे बिना हर सुबह एक सन्नाटा है, हर शाम की चाय में तेरा ख्याल है। रिश्तों की तस्वीरों में बस तेरा अक्स है, खोई हुई यादों की बस यही एक चाल है।

तेरे बिना बातें अधूरी हैं, सपनों में भी अब तन्हाई है। हर एक मुस्कान में छुपा है, खामोशी का ये कितना बड़ा साया।

तेरे बिना हर एक लम्हा, जैसे बारिश में सूखा सहरा। तेरे ख्वाबों की गूंज अब, बस रह गई है, एक अधूरी दुआ।

खुली आँखों में बसी थी एक हसीन याद, वो पल अब धुंधले, जैसे बारिश में बिछी चादर, तू थी तो सब था, अब तन्हाई का है साया, हर लम्हा तेरा एहसास, दिल को करता है बेकरार।
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