
खुली आँखों में बसी थी एक हसीन याद, वो पल अब धुंधले, जैसे बारिश में बिछी चादर, तू थी तो सब था, अब तन्हाई का है साया, हर लम्हा तेरा एहसास, दिल को करता है बेकरार।

तुम्हारे बिना जीने की कोशिश की, हर बार खुद को पहले से भी बेकार पाया। जब शख़्स नहीं है पास, तो खुद से ही मोहब्बत करना सिख गया।

तेरे बिना इस दिल की धड़कनें, जैसे खामोश रास्तों पर, गुमसुम सी चलती हैं, बिना मंजिल के।

तेरे जाने के बाद, ये खामोशियाँ बोलने लगीं, हर एक सांस में, तेरे इश्क की खुशबू खोने लगीं। जिस रस्ते पर चल कर, हम कभी साथ थे, वहाँ अब सिर्फ यादें, मेरे साथ रोने लगीं।
Comments
Loading comments...