
तेरे बिना हर एक लम्हा, जैसे बारिश में सूखा सहरा। तेरे ख्वाबों की गूंज अब, बस रह गई है, एक अधूरी दुआ।

खुली आँखों में बसी थी एक हसीन याद, वो पल अब धुंधले, जैसे बारिश में बिछी चादर, तू थी तो सब था, अब तन्हाई का है साया, हर लम्हा तेरा एहसास, दिल को करता है बेकरार।

तुम्हारे बिना जीने की कोशिश की, हर बार खुद को पहले से भी बेकार पाया। जब शख़्स नहीं है पास, तो खुद से ही मोहब्बत करना सिख गया।

तेरे बिना इस दिल की धड़कनें, जैसे खामोश रास्तों पर, गुमसुम सी चलती हैं, बिना मंजिल के।
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