1 Shayari
उफ़ुक से छनकर जो धूप कमरे में उतर आई है, तेरी मुस्कान की रंगत अपने साथ लाई है। ज़माने का शोर अभी सो रहा है फ़िलहाल, यह ख़ामोश सुबह सिर्फ़ तेरे लिए मुस्कुराई है।