
हर रोज़ तेरा इंतज़ार करता हूँ, तेरे बिना जैसे ये सफर अधूरा है। सूरज भी तेरा दीदार चाहता है, पर तेरा चाँद सा ख्वाब, नसीब में पूरा है।

गली में तेरे नाम की खुशबू बसी है, हर शाम मेरी आँखों में तेरा नज़ारा है। तेरी यादों के साए में सिमटा हूँ मैं, बस एक पल की दूरी, और मेरा सारा जहां है।

तुम्हारी यादों की बारिश में, सुनहरा सपना बुनता हूँ, हर बूँद में तुम्हारे लौटने का, इंतज़ार ही अब जीने का कारण है।

तेरे बिना हर लम्हा अधूरा लगता है, हर सुबह तेरा ख्वाब सजता है। बस एक तेरे आ जाने की ख़्वाहिश है, फिर हर दर्द भी ख़ुशी में बदलता है।
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