
तेरे बिना हर सुबह जैसे, चाँद बिना रात की चाँदनी। तेरे साथ ही तो खिलते हैं, मेरे दिल के सारे अरमां।

तेरे बिना हर सुबह एक खामोशी होती है, तेरी यादों की बाहों में सिसकियाँ होती हैं। खुद से अब कोई बात नहीं होती, जबसे तेरा चेहरा मेरी आँखों में बसी हुई है।

जब चाँद की रोशनी से तुम मुस्कुराते हो, हर रात मेरी खामोशी में तुम बोलते हो। हवा में तुम्हारी खुशबू बसी रहती है, जैसे हर लम्हा तुम मेरे करीब होते हो।

तेरे बिना अधूरी शामें, जैसे चाँद बिना रात, हर लम्हा तेरा एहसास, दिल में बसा है हालात। तेरे बिना ये सांसें, हैं जैसे खामोश साज़, तेरे संग ही जीना, मेरी हर एक चाहत की आवाज।
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