
शाम की चादर में छिपे हैं कुछ ख्वाब, तेरे बिना ये लम्हे, लगते हैं अंधेरे सब यार। तेरे साथ बिताए पल, यादों में हैं महके, अच्छा है ये शाम, जब तू हो पास मेरे, बार-बार।

चाँदनी रात में तेरी यादें हैं बसी, हर लम्हा तेरे बिना अधूरी सी लगती है। इस शाम की ठंडी हवा में तेरा एहसास, दिल को छू जाए जैसे एक मीठी सी आवाज।

जब भी ढलती है शाम, तेरी यादों का बादल छाता है, हर एक लम्हा, तेरे बिना अधूरा सा लगता है। चाँदनी में तेरा नाम लूँ, हर ख्वाब में तेरा साया हो, इस गुनगुनाती शाम में, तेरा इंतज़ार हर साया हो।

जब शाम की चाय उबलती है, तब यादों की खुशबू महकती है। तुम्हारे बिना ये पल अधूरे हैं, जैसे चाँद बिना रातों के सूनें हैं।
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