
खुद पर ऐतबार किया है, अब दुनिया से क्या डरना। जो न समझे मेरी अदाओं को, उनकी नजरों में रहता है मेरा असरना।

खुद पे इतना नाज़ है मुझे, जितना दुनिया को मेरे अंदाज़ है। बातों में जब चिंगारी मिले, तो चुप रहना ही सबसे बड़ा इत्तेफाक है।

मैं वो किताब हूँ, जिसे सबने पढ़ा, पर हर पन्ना मेरा एक राज़ छुपाए है, सिर्फ मुखौटों से नहीं, असली रूप से पहचानो, असली अदा से जो दिल में बस जाए।

जब खुद की पहचान बन गई, तो अब किसी की परवाह नहीं। अहंकार नहीं, सिर्फ आत्म-विश्वास है, ज़िंदगी में अब किसी की जरूरत नहीं।
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