अब हम एक-दूसरे के ऑनलाइन होने पर मुस्कुराते नहीं, फ़ोन की स्क्रीन धुंधली होती है, पर कॉल मिलाते नहीं। कितना अजीब है न यह नया दौर हमारी मोहब्बत का, एक ही शहर में रहकर भी अब हाल तक बताते नहीं।
न कोई तंज किया हमने, न कोई शिकायत की, बस ख़ामोशी से तेरे शहर से अपनी राहें मोड़ लीं। तुम ढूँढते रह जाओगे मुझमें वो पुराना शख़्स, हमने बदल लीं वो आदतें जो तुम पर ख़त्म होती थीं।
अब किसी से शिकायत करने का मन नहीं करता, दर्द तो बहुत है मगर अब शोर नहीं करता। रात को जब बेहिसाब याद आती है तुम्हारी, फ़ोन साइलेंट करके बस ख़ामोशी से सो जाता हूँ।

तेरे बिना ज़िंदगी के रंग फीके हैं, खामोश लफ्ज़ों में तेरा नाम छुपा है। दिल की गहराइयों में बस तू ही है, तेरे जाने से जैसे सबकुछ अधूरा सा है।
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