
तेरा जाना इस तरह, जैसे कोई साया चला गया, हर सुबह की किरण में, तेरा एक अंश खो गया। सपनों की गलियों में, अब तन्हाई बसी है, तेरे बिना ये दिल, हर पल बस तड़पता रहा।

तेरे बिना हर सुबह अधूरी है, ज़िंदगी की राहें अब सूनसान सी हैं। तेरे साथ बिताए लम्हों की क़ीमत, आँखों में भरी यादें, दिल में दर्द छिपा है।

तेरे बिना मुस्कुराना अब मुश्किल है, दुख की परछाइयाँ हर शाम सजती हैं। ख्वाबों में भी अब तेरी कमी महसूस होती है, दिल के किसी कोने में, तेरी याद बसती है।

तेरी यादों का साया जब भी मुझ पर छा जाता है, खुद को ढूंढना मुश्किल, जब दिल तन्हा हो जाता है। तेरे बिना ये सफर अधूरा, न कोई मंजिल नजर आती, हर क्षण बस तेरी कमी, ये दिल बार-बार तड़प जाता है।
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