
तेरी मंज़िल की राह में, मैं खुद को खो दूं, तेरे इश्क की गहराइयों में, मैं डूबा रहूं। लेकिन ये ना सोचाना, कि तूने मुझसे क्या चाहा, सीने में छुपा है तेरा नाम, या बस एक ख्वाब का साया।

चाय की पहली चुस्की में, तेरी यादों का स्वाद है, दिल की कढ़ाई में बसी, तेरी हंसी का इराद है। हरSip में तेरा एहसास है, इसी से तो ये पल गुलज़ार है।

तेरे बिना ये शाम सुनी है, तू ही मेरी खामोशियों की सदा है। बातें जो अधूरी हैं कभी, क्या वो सिर्फ मुझे समझा है?

तेरे मुँह से निकले अल्फाज़, एक ख्वाब जैसी बातें, चup चुप रहना भी तेरा, मुझे समझ में ना आता है। कभी तो बोल दे सच्चाई, या इन आँखों की कहानी, तेरी हर ख़ामोशी में छुपा है प्यार का जज़्बा भी।
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