
तेरे बिना ये शाम सुनी है, तू ही मेरी खामोशियों की सदा है। बातें जो अधूरी हैं कभी, क्या वो सिर्फ मुझे समझा है?

तेरे मुँह से निकले अल्फाज़, एक ख्वाब जैसी बातें, चup चुप रहना भी तेरा, मुझे समझ में ना आता है। कभी तो बोल दे सच्चाई, या इन आँखों की कहानी, तेरी हर ख़ामोशी में छुपा है प्यार का जज़्बा भी।

तेरे इश्क का असर इतना गहरा है, हर बार तेरा नाम लेते ही दिल धड़कता है। लेकिन जब तुम पास होती हो, लगता है ये दिल, खुद को छुपा रहा है, या सच में कुछ और चाहता है।

तेरे अल्फाज़ में वो मिठास है, जिसके पीछे छुपा है एक राज़ पास है। जब तू मुस्काती है, दिल में जलते हैं, हर लम्हा तेरा, जैसे आशिक़ी की आग बास है।
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