
तेरे बिना ये रातें यूँ ही गुज़रती हैं, आँखों में बसी तन्हाई सिसकती है। हर एक ख्वाब में तेरा ही अक्स है, दिल की धड़कनें भी अब तेरा ही नाम लेती है।

इस दर्द भरी रात में, तन्हाई का साया है, तेरे बिना हर लमहा, जैसे एक सहरा है। ख्वाबों में भी तेरी याद, मुझे रुला जाती है, मेरे दिल की हर धड़कन, बस तेरा ही नारा है।

तेरे बिना ये शामें कितनी वीरान लगती हैं, हर हंसी में तेरी यादों की छाँव होती है। तू जब से गया है, दिल की धड़कन भी सो गई, हर लम्हा अब तेरे बिना, बस एक तन्हाई की दावत होती है।

इस बिछड़ने के ग़म में, हम ठहर गए हैं, तेरे बिना हर खुशी में, क्यों बेकरार रहे हैं। सपनों में तेरे हंसने की आवाज़ सुनते हैं, लेकिन जब आँखें खुलती हैं, बस हम ही हम रह जाते हैं।
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