Adult Shayariहिंदी
जवानी और कमर दर्द की दास्ताँ
कभी दिल टूटने पर रात भर जागकर रोया करते थे,
अब पीठ के दर्द से रात भर करवटें बदलते हैं।
वो इश्क के हसीन ख्वाब तो जाने कहाँ खो गए,
अब हम शनिवार को भी रात नौ बजे ही सोते हैं।
क्रेडिट कार्ड के बिल देखकर आँखें भर आती हैं,
और लोग समझते हैं कि हम पुराने प्यार को याद करते हैं।
अब जवानी का ये आलम है मेरे दोस्त,
चाय की टपरी पर भी हम सिर्फ एसिडिटी की बात करते हैं।
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