1 Shayari
ना कोई दिखावा ना अब वो बचकानी ज़िद रही, इश्क़ अब ख़ामोशी से एक-दूसरे को समझने लगा है। तुम्हारी एक नज़दीकी ही काफ़ी है मेरी रूह के लिए, कि बिन छुए भी ये दिल सुकूँ से धड़कने लगा है।