1 Shayari
ताकत से नहीं, मेरे एटीट्यूड से पहचानते हैं, जब भी मिलता हूँ, कभी छाया बनके, कभी साया बनके। चुप रहूँ तो भी मेरे हौंसले की गूंज सुनाई देती है, क्योंकि मैं वो तारा हूँ, जो खुद से ही रोशनी बिखेरता है।