1 Shayari
दिन भर की थकान जब शहरों में सो जाती है, तेरी सांसों की गरमाइश में रात ठहर जाती है। कुछ न कहकर भी जब तू ज़ुल्फ़ें हटाती है, ज़िंदगी बस उसी एक लम्हे की होकर रह जाती है।