
तेरे बिना अधूरी रातों में, खामोशियों का साया है। तेरे ख्वाबों की खुशबू से, हर सुबह एक नया साजा है।

तेरे इश्क में खो जाने की ख्वाहिश है, हर गली पर तेरे ही नाम की खुशबू है। छू लूं तुझे, बस यही एक ख्वाब है, तेरे बिना हर रात, सन्नाटे की एक तन्हाई है।

तेरे बिना ये खामोशियाँ, हर सुबह को शाम कर देती हैं। बस एक नज़र की तलाश है, जो मेरे दिल की धड़कन को पहचान ले।

तेरे बिना गुजरती हैं रातें, चाँद की चाँदनी भी लगती है सिसकियाँ। तेरे ख्वाबों में खोकर, मैं खुद को भुला दूँ, तेरे बिना ये जिंदगानी, जैसे अधूरी कहानी।
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