
हर सुबह की किरण संग, नए सपनों का हो सफर, दोपहर की धूप में छिपा, है हँसी और चेहरे का निखार। चाय की पहली चुस्की में, महसूस करो ये अहसास, जिंदगी की इस मोहब्बत में, है सुकून भरी हर एक बात।

इस दोपहर की धूप में, सपनों का साया ढूंढो। जो अधूरे रह गए थे कभी, उन ख्वाबों को फिर से जी लो।

तेरी यादों की छाँव में, सूरज की किरणें भी मुझसे मुस्कुराती हैं। इस दोपहर की हल्की रौनक में, तेरे बिना ये लम्हें भी अधूरे लगते हैं।
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