
ओस की बूंदों पे जैसे धूप का निखार आता है, तुझे सोचकर मेरी सुबह में यूँ ही खुमार आता है। ज़माने के लिए तो बस एक नया दिन शुरू हुआ है, पर मुझे हर सवेरे तुझपे नया प्यार आता है।

हर सुबह एक नया सपना लाती है, सूरज की किरणें खुशियों की बातें करती हैं। चलो, मिलकर इस दिन का स्वागत करें, खुशियों से भर लें, ये लम्हे सुनहरे कर दें।

अलार्म बजने से पहले जो आँखों में घुले, वो ख़्वाब हो तुम, इस भीनी सी ठंडी सुबह का सबसे हसीन जवाब हो तुम। शहर तो भागने लगा है अपनी पुरानी रफ्तार से, मेरी इस खामोश भोर का एकलौता आफ़ताब हो तुम।

सुबह की पहली चाय में तेरा ख़याल घोला है, धूप ने खिड़की पे आके तेरा ही नाम बोला है। दिन तो खैर गुज़र जाएगा दफ़्तर और कामों में, ये पहला लम्हा बस तेरी यादों के नाम खोला है।
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