
जिन्हें मेरा अंदाज़ नहीं पसंद, उन्हें मेरा नज़ारा नहीं चाहिए, मैं खुद को बदलूँ, ये ना हो सकता, मेरी पहचान, मेरी शान है।

हम चुप रह कर भी ख़ुद की पहचान रखते हैं, जो बातें दिल की हैं, वो ज़ुबां पर भी लाते हैं। दूसरों की सोच से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, अपने नज़ाकत में ही, हम खुद को खिलाते हैं।

ताकत से नहीं, मेरे एटीट्यूड से पहचानते हैं, जब भी मिलता हूँ, कभी छाया बनके, कभी साया बनके। चुप रहूँ तो भी मेरे हौंसले की गूंज सुनाई देती है, क्योंकि मैं वो तारा हूँ, जो खुद से ही रोशनी बिखेरता है।
Log kya kahenge, ye sochna chhod diya, jab se khud pe bharosa kiya.
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