इश्क़ के समंदर में उतरे थे कभी हम भी बड़े शान से, अब तो बस आठ घंटे की पूरी नींद मांगते हैं भगवान से। वो पूछती है कि रात भर किस ख़्याल में गुम रहते हो, हम मन ही मन जोड़ते हैं हिसाब क्रेडिट कार्ड के भुगतान से।

तेरे बिना ये रातें अधूरी हैं, सपनों में भी तेरी यादें होती हैं। खामोशियों में तेरी हंसी बसी है, इश्क़ की परछाई, अब तो हर जगा है।

तेरे बिना ये दिल मुझसे बात करता है, हर खामोशी में तेरा नाम रहता है। तू है मेरा ख्वाब, मेरी जन्नत का साया, तेरे ख्यालों में हर रात बिताता है।

किसी और की बाहों में खोने की चाहत, पर खुद से जुदा होने का डर ज़्यादा है। तेरे बिना, ये अधूरी सी कहानी, जिंदगी के हर मोड़ पे तेरा ही साया है।
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