
जब भुख लगी हो दिल को, तब सुगंध लाती है रोटी, और मांस की गरम तश्तरी, जैसे इश्क में हो कोई ख़ुशी।

जब भी बनती है मटन की करी, तेरे साथ की यादें ताज़ा हो जाती हैं। हर निवाला जैसे लम्हों का जश्न, तेरे बिना ये दावत अधूरी रह जाती है।

जब दोस्त बोले, 'चicken क्यों नहीं खा रहे?' मैंने कहा, 'भाई, मेरी मम्मी ने कहा, ‘पंखा चलाते समय चूहे नहीं खा सकते!’ फिर वो हंस के बोला, 'तो फिर मछली ले लो!' मैंने कहा, 'मछली की याद से ही, बच्चों को डर लगता है, जाल में फंसने का!' अरे भाई, इस जिन्दगी में, क्या खा रहे हैं, ये तो सच में तला हुआ है!
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