
तेरे बिना हर लम्हा, जैसे सन्नाटा हो, बेताब दिल की धड़कन, अब तो राहत हो। सपने अधूरे रह गए, बस यादें ठहर गईं, अब तो बस तन्हाई में, खुद से ही बातें करें।

तेरे बाद अब सिर्फ खामोशियाँ हैं, हर खुशी में तेरा नाम बसा है। आसमान में तारे भी उदास हैं, तेरे बिना ये रात भी सजा है।

तेरी यादों का साया, हर रात मुझ पर छाया। बातें अधूरी रह गई, जाने क्यों दिल तन्हा हुआ।

उनकी यादें एक साया बन गईं, खामोशी में मेरी बात बन गईं। हर लम्हा अब तन्हाई का फसाना है, बिन उनसे, ये सांसें भी बेगाना हैं।
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