
तेरी यादों की गूंज में, खामोशी का आलम है, हर लम्हा तेरा इंतज़ार, दिल की यह मजबूरी कम है।

तेरी यादों की गहराई में, हर लम्हा खो जाता हूँ। तेरे बिना यह दिल, बस एक सवाल बन जाता हूँ।

तेरी आँखों की गहराई में, छिपे हैं मेरे ख्वाब कई, जिन्हें तूने पढ़ा नहीं कभी।

तेरे बिना हर सुबह, एक तन्हा सफर है, दिल की हर धड़कन में, तेरा ही असर है। साँसों में बसी है सदा, तेरी ही कहानी, खामोशियों में भी तेरा, चुपचाप बसेरा है।
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