
चाय की चुस्की में डूबे हैं ख्याल, तेरी यादों का आता है फिर एक हाल। कटे दिन तो कटे, पर रातों में ये ख्वाब, फिर से बनेगा कोई नया सवेरा, ये है मेरा इरादा कमाल।

दौड़ने लगे हैं सब, फ़िटनेस का है बुखार, पर चाय की एक चुस्की, सबको कर दे बेकार। पानी-पत्ते से ज़्यादा पसंद, बिस्किट-कुकीज़ की बात, खुद को टॉस करने से पहले, चाय की दीजिए सौगात।

रसोई में बर्तन की खड़खड़, जैसे मेरी बीवी की बातें कम नहीं होती। हर रोज़ नया वरदान सुनाए, पिछला जरा भी याद नहीं होती।

हर सुबह जब उठता हूँ, चाय की खुशबू से, सोचता हूँ, आज तो खुश रहूँगा, पर वो अरे! फिर से, काम का बोझ, और मीटिंग्स का चक्कर, ऐसे में कहीं हंसना भूल जाता हूँ, ये मेरा सफर।
Comments
Loading comments...