प्रेम शायरी - आंखों की गहराई को समझ नहीं सकते
आंखों की गहराई को समझ नहीं सकते,
होंठों से कुछ कह नहीं सकते,
कैसे बयां करें हम आपको हाल इस दिल का,
तुम्हीं हो जिसके बगैर हम रह नहीं सकते...।
यह जिन्दगी चल तो रही थी, पर तेरे आने से मैंने जीना शुरू कर दिया
तेरे ख्वाबों के साथ ही हमने-तुमने जीना शुरू किया
अच्छा लगता हैं तेरा नाम, मेरे नाम के साथ जैसे
कोई खूबसूरत सुबह जुड़ी हो, किसी हसीन शाम के साथ !
झुकी झुकी सी नजर बे-करार है कि नहीं,
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं।
वो प्यारी सी हंसी वो उसका खिलखिलाना,
बड़ी मासूमियत से यूं नजरें मिलाना,
जो देखूं मैं उसको, तो उसका शरमाना,
मेरे दिल में हजारों उमंगें जगाना।
गुलाब की खूबसूरती भी फीकी सी लगती है,
जब तेरे चेहरे पर मुस्कान खिल उठती है,
यूं ही मुस्कुराते रहना मेरे प्यार तू,
तेरी खुशियों से मेरी सांसे जी उठती हैं।
करनी है खुदा से एक गुजारिश
तेरे प्यार के सिवा कोई बंदगी ना मिले
हर जनम में साथी हो तुम जैसा
या फिर कभी जिंदगी ही ना मिले।
आंखों की गहराई को समझ नहीं सकते
होंठों से कुछ कह नहीं सकते
कैसे बयां करें हम आपको हाल इस दिल का
तुम्हीं हो जिसके बगैर हम रह नहीं सकते।
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